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मनुष्य बदल गया है

इस डाल पर नित भोर तू आती  मिस्री सी मिठास लिए संगीत में  जन जीवन की गतिशीलता बढ़ाती   तेरा करुण राग मेरे भावहीन मन को   रचनात्मक कल्पनाओं से तृप्त कर देता है  चौखट पर बैठ निहारती हूँ अकस्मात  तेरे बोल में छुपे सन्देश को समझ पाने के लिए  शायद हमारा पूर्ण जुड़ाव नहीं हो सका है  तभी तो तेरे कु कु की आवृत्ति  सभी को अनबुझी पहेली मालूम होती है  एक बात बड़ी गहरी जान ली है मैंने  तू कल भी सरल थी आज भी है  तेरी वाणी में तेजस और क्रांति है  नज़र वही नजारे वही पर देखने का तरीका बदल गया तू वही है, संसार वही है पर मनुष्य बदल गया 

आज कहानी कुछ और होती

ख़ामोशी के अफ़साने में  शब्दोँ का दमन नही होता  शोर के मध्य शान्ति का  असर नही होता  ठीक जैसे अन्धकार हो जाता है  विलुप्त हर उषा को  सच नहीं बैठता देर तक   अन्धकार कि चादर ओढ़हे  देखी पर विश्वास है  पर विश्वास तो अदृश्य है दरख्वास्तें हुई, पर्दे भी हटे  सच कि अंतः विजय हुई  पर एक कसक रह गई  दिल के एक कोने में , बंजर  ऐतबार कर लिया होता गर  आज कहानी कुछ और होती  हमें वक्त ने गढ़ा शर्त पर  उसके मुताबिक ढल जाने को शायद हम वक्त को ढाल लेते  अपने अनुसार लाख आजमाने पर 

अलफ़ाज़

दिल से निकले अलफ़ाज़ गूंजने दो इस तम्मना भरे दिल की चाहत  राज खोलने की है  इन्हें अश्कों में बयाँ होने दो  मुस्कुराहटों के पीछे छिपे दर्द में लिपटे होंटों  की सुनवाई आज होने दो  दिल के अलफ़ाज़ अश्कों में बयाँ होने दो  धुन्दला सी गई मेरी मंजिल  इस बावरे मन को  एक पल ही सही ठहरने दो  पल पल गुज़रती रही हादसों से मैं  एक बार उन हादसों को मुझसे गुजरने दो  दिल के अलफ़ाज़ अश्कों में बयाँ होने दो  P.S.- Need not worry. It's just the part of my sentiments directed by my imagination.