Skip to main content

Posts

Showing posts with the label स्वर्ण कौर

कवि

कहाँ - कहाँ ये चले जाते हैं कवि ,   भावनाओ के समुंदर में डुबकी लगा       संवेदनाओ  के अनमोल मोती  चुन लाते हैं   , जिस यथार्थ से अछुता है भुक्त  भोगी , उसे हर पल जीते हैं ये बन कर योगी , सतह से वास्ता न कोई इनका  ,  गहराईयों से ले आते हैं ज्योति , काल जय लेखनी बन इनकी अवरोध देती प्रलय क्रीड़ा की , समय बोध है इनकी अचुद थाती करुना से हैं ह्रदय के प्यास भुझाते  मेरी  दादी जी  द्वारा - स्वर्ण कौर