उडूगी मै खुल कर आज

by - Tuesday, May 24, 2011


उडूगी मै खुल कर आज ,
आने न दूंगी अपने सपनों पर आंच ,
चाहे कितनी भी आ जाये  अड़चने ,
डट के लडूंगी ,
पीछे नहीं हटूंगी ,
अपने सपने सच करुँगी ,
तैयार हु मै हर बाज़ी के लिए ,
तैयार हु मै खुद को साबित करने के लिए ,
अपने उसूलों को न छोडूंगी,
अपने होसलें को न टूटने दूंगी ,
यूही अपने सपनों को न जलने दूंगी ,
उडूगी मै  खुल कर आज   ,
आने न दूंगी अपने सपनों पर आंच ,
चाहे कोई भी ताकत रोक ले आज ,
नहीं गिरा पाएगा मेरे सपनों पर गाज ,
क्यूंकि मै न मनूगी हार ,
कर दूंगी हर मुसीबत को तार तार

ये उस हारे हुए व्यक्तित्व की आवाज़ है जो हार के भी मन  से जीता है और वास्तव मै जीतने का जस्बा रखता है और एक पंची की तरह खुल कर ऊँची उड़ान भरना चाहता है