Sunday, June 08, 2014

मनुष्य बदल गया है


इस डाल पर नित भोर तू आती 
मिस्री सी मिठास लिए संगीत में 
जन जीवन की गतिशीलता बढ़ाती  
तेरा करुण राग मेरे भावहीन मन को 
 रचनात्मक कल्पनाओं से तृप्त कर देता है 
चौखट पर बैठ निहारती हूँ अकस्मात 
तेरे बोल में छुपे सन्देश को समझ पाने के लिए 
शायद हमारा पूर्ण जुड़ाव नहीं हो सका है 
तभी तो तेरे कु कु की आवृत्ति 
सभी को अनबुझी पहेली मालूम होती है 
एक बात बड़ी गहरी जान ली है मैंने 
तू कल भी सरल थी आज भी है 
तेरी वाणी में तेजस और क्रांति है 
नज़र वही नजारे वही पर देखने का तरीका बदल गया
तू वही है, संसार वही है पर मनुष्य बदल गया