Sunday, June 08, 2014

मनुष्य बदल गया है


इस डाल पर नित भोर तू आती 
मिस्री सी मिठास लिए संगीत में 
जन जीवन की गतिशीलता बढ़ाती  
तेरा करुण राग मेरे भावहीन मन को 
 रचनात्मक कल्पनाओं से तृप्त कर देता है 
चौखट पर बैठ निहारती हूँ अकस्मात 
तेरे बोल में छुपे सन्देश को समझ पाने के लिए 
शायद हमारा पूर्ण जुड़ाव नहीं हो सका है 
तभी तो तेरे कु कु की आवृत्ति 
सभी को अनबुझी पहेली मालूम होती है 
एक बात बड़ी गहरी जान ली है मैंने 
तू कल भी सरल थी आज भी है 
तेरी वाणी में तेजस और क्रांति है 
नज़र वही नजारे वही पर देखने का तरीका बदल गया
तू वही है, संसार वही है पर मनुष्य बदल गया 

18 comments:

  1. Beautifully woven..just loved it..

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    1. I am elated that you loved it, Ranita ji :)
      Thank you!

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  2. नज़र वही नजारे वही पर देखने का तरीका बदल गया
    तू वही है, संसार वही है पर मनुष्य बदल गया

    एकदम सत्य कहा है आपने सिमरन जी मनुष्य बदल गया बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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    1. आपके निरंतर यहाँ आने एवं मेरी रचनाओं पर टिप्पड़ी करने से मुझे प्रोत्साहन मिलता है। मैं आपको दिल से धन्यवाद देना चाहती हूँ। बेहद ख़ुशी हुई की आपने इस कविता की सबसे एहम पंक्तियों को गहरी समझ के साथ पढ़ा और एहसास किया। आपकी बात आपके पाठकों तक सही पहुंच जाये उससे अच्छी बात और क्या होगी।

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  3. Speechless ... I get inferiority complex reading your blog nowadays :p

    You have really grown into an awesome poetess ... your words polished and expressions so true ... loved it buddy :-)

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    1. Ohh! You are such an Awesome writer. You need not feel so ...
      That's all because of your constant encouragement and true views on my work. Glad to find a gem here :)
      Thank you, Emerald! :D

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    2. I agree with Amrit, I get inferiority complex reading your blog :) Absolutely beautiful.

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    3. You need not, Dearo :)
      Surprised to have a rare compliment from you. Thanks!

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  4. पहली बार मैंने आपकी कविता हिन्दी में पढ़ी है
    यह वास्तव में बहुत सुंदर है
    और दिल को छू लेती है..

    आपका दोस्त सुलैमान

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    1. मुझे यह जान कर बेहद ख़ुशी हुई की इस कविता ने आपका दिल छू लिया। आपके शब्दों से मेरा उत्साह और भी बढ़ गया है। बहुत बहुत धन्यवाद

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  5. It took a while reading this poem dear! but beautiful poem...Esp last lines...Hope people don't change and protect our nature and environment :)

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    1. Glad you read and received the exact message. Thanks Valli dear :)

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  6. मनुष्य ने तो वह वृष ही नहीं छोड़े की कोई उनपर आकर कू कू कर सके , उत्तम रचना

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    1. आपने बिलकुल सही कहा। आप जैसे उच्च कोटि के हिंदी कवि की टिप्पड़ी पढ़कर मुझे ख़ुशी हुई। आपका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है। धन्यवाद

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  7. Please say you are not in late teens. Say you are 20+. This is so damn good for someone as young as you. :)

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    1. Hahah...that's really sweet of you, Saru dear ^_^
      Thanks a lot <3

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  8. Very good! Tiz good your pen has new language.

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    1. Glad to have you here. Thank you, Sir :)

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Either positive or negative comments are good because it shows I am still relevant. Hope you enjoyed reading here:-) !!
~Simran