Sunday, May 11, 2014

आज कहानी कुछ और होती

ख़ामोशी के अफ़साने में 
शब्दोँ का दमन नही होता 
शोर के मध्य शान्ति का
 असर नही होता 
ठीक जैसे अन्धकार हो जाता है
 विलुप्त हर उषा को 
सच नहीं बैठता देर तक 
 अन्धकार कि चादर ओढ़हे 
देखी पर विश्वास है 
पर विश्वास तो अदृश्य है
दरख्वास्तें हुई, पर्दे भी हटे 
सच कि अंतः विजय हुई 
पर एक कसक रह गई 
दिल के एक कोने में , बंजर 
ऐतबार कर लिया होता गर 
आज कहानी कुछ और होती 
हमें वक्त ने गढ़ा शर्त पर 
उसके मुताबिक ढल जाने को
शायद हम वक्त को ढाल लेते 
अपने अनुसार लाख आजमाने पर 

8 comments:

  1. मुझे यह कविता पसंद आई। इस कविता के ज़रिये जो संदेश तुम हम तक पहुँचाना चाहती हो वो बहुत खूबसूरत है। हालांकि मैं ये भी जानती हूँ की सिमरन इससे भी बेहतर हिन्दी कविता लिख सकती है। लिखते रहो और ऐसे ही बेहतरी की ओर अग्रसर रहो। :)

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  2. TIME ,waqt ... it does not wait for anyone

    lovely poem
    Bikram

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  3. wah wah...beautiful simran..
    loved it....<3<3

    my recent one :http://www.vanitynoapologies.com/2014/05/bourjois-rouge-edition-velvet-lipstick-velvet-02-frambourjoise-review-swatches.html

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  4. बहुत सुन्दर कोमल भाव .प्यारी रचना

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  5. शायद हम वक्त को ढाल लेते
    अपने अनुसार लाख आजमाने पर

    बहुत सुन्दर खूबसूरत भावों को दर्शाती सुन्दर रचना |

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  6. actually...its simple awesome... :)

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  7. छोटी सबी लोग को इस सुन्दर कविता से बहुत कुछ सिखने है!
    शायद हम वक्त को ढाल लेते
    अपने अनुसार लाख आजमाने पर
    तो कहानी होगा हमारी अनुसार!!!
    तुम तो वाक्य खूबसूरत कविता लिखी <3

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  8. Wow ... you are multi talented ... your English poems are magical, and now Hindi too? Superb.

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~Simran